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शनिवार, 23 अक्टूबर 2010

वापसी: एक अरसे के बाद

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एक मुद्दत के बाद इस चिठ्ठे पर कोई पोस्ट कर रहा हूँ। लगभग साढ़े तीन साल के बाद। पर इसका यह मतलब कतई नहीं है कि मैं पुराना चिट्ठाकार हूँ, दरअ...
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रविवार, 8 अप्रैल 2007

वो जो एक पेड़ था

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प्र कृति की सर्वोत्तम कृति है मनुष्य। और आज यही मनुष्य प्रकृति को नष्ट किये जा रहा है। अंधाधुंध पेड़ों की कटाई, प्रदुषण, पानी का अपव्यय, जैव...
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मंगलवार, 20 मार्च 2007

भारत २० वर्ष बाद - एक स्वप्न

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इससे पहले कि आप इसे पढ़ें मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि यह मेरी कल्पना नहीं है। लगभग दो साल पहले मेरे मेल मे यह मैसेज आया था। जिसने मुझे भ...
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शुक्रवार, 16 मार्च 2007

नारद पर यह भेदभाव क्यों?

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नारद- रखे सबकी खबर। पर क्या नारद जी सबको एक ही नज़र से भी देखते हैं? सोचता तो मैं यही था पर अब दोबारा सोचना पड़ रहा है। क्यों? अजी साहब ऐसा है...
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गुरुवार, 8 मार्च 2007

कबीरा खड़ा स्टेज पर

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क्या आपने कभी संत कबीर को देखा है? मैने देखा है। साक्षात! शबद और दोहे गाते हुए और अपनी जीवन कथा सुनाते हुए। मैं बात कर रहा हूँ "शेखर स...
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शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2007

ट्रक, कुत्ते और कविता

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भो पाल शहर की बात कर रहा हूँ पर ये नज़ारा तो किसी भी शहर में आम हो सकता है। रोज सुबह मैं अपनी बाइक की सवारी करते हुए कॉलेज जाता हूँ जहाँ मैं ...
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कुछ मेरे बारे में

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सोमेश सक्सेना
भोपाल, मध्य प्रदेश, India
थोड़ा बहुत लिख लेता हूँ पर न तो इतनी प्रतिभा है न समर्पण कि खुद को लेखक कह सकूँ। हाँ "लगभग लेखक" अवश्य हूँ। इस अक्षमता के कारण ब्लॉगिंग भी कायदे से नहीं कर पाता हूँ इसलिए "'लगभग ब्लॉगर" भी हूँ। और अपने बारे में क्या कहूँ? मैं न तो बहुत अच्छा हूँ, न बहुत बुरा। न बहुत ईमानदार हूँ और न ही बहुत बेईमान। कोई बड़ा आदमी भी नहीँ हूँ। एक बहुत ही साधारण व्यक्ति हूँ बस। प्रकृति, कला, संस्कृति, साहित्य से विशेष लगाव है।
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