रविवार, 26 दिसंबर 2010
फिर सुनाओ यार वो लम्बी कहानी
›
सर्वप्रथम सभी साथियों और वरिष्ठजनों को नववर्ष 2011 की अग्रिम शुभकामनाएँ... आप सभी के लिए आने वाला यह साल मंगलमय रहे यही कामना करता हूँ आज प्...
27 टिप्पणियां:
सोमवार, 20 दिसंबर 2010
प्रतीक... एक कविता
›
सूर्य का ढलना प्रतीक है इस बात का कि हमेशा नहीं रहता दिन का उजाला और सूर्य का निकलना प्रतीक है इस बात का कि हमेशा नहीं रह सकता रात ...
19 टिप्पणियां:
बुधवार, 15 दिसंबर 2010
क्योंकि हर बात की एक हद होती है
›
पेश हैं कुछ हल्के-फ़ुल्के गुदगुदाते जुमले। इनमें से कुछ तो मैने E-mails और sms से संकलित और अनुवादित किए हैं और बाकी अपने तरफ से जोड़े हैं। ...
22 टिप्पणियां:
शनिवार, 11 दिसंबर 2010
डॉक्टर की दुकान में ग्राहकों की भीड़
›
पि छले हफ्ते की ही बात है। मेरे एक परिचित को तेज पीठ दर्द की तकलीफ थी। उन्हे लेकर डॉक्टर के पास जाना था, तो उन्ही के बताए एक डॉक्टर के पास ...
14 टिप्पणियां:
गुरुवार, 25 नवंबर 2010
आँख मूँद कर पढ़ने वाले उर्फ़ चाट और कुल्फी
›
ब ड़ा ही अजीब लड़का था वो। पर कुछ भी कहो बात तो पते की कह गया। हुआ यूँ कि उस दिन मैं सब्जी लेने बाज़ार गया था। तो जब एक चाट के ठेले के पास ...
30 टिप्पणियां:
शनिवार, 13 नवंबर 2010
यह अपना क्षेत्र नहीं है...
›
उस दिन की बात है। मैं चौराहे की चाय की दुकान के सामने खड़ा था। इंजीनियरिंग के कुछ छात्र भी वहाँ चाय की चुस्कियाँ मार रहे थे। तभी एक बाइक में...
14 टिप्पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें