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रविवार, 30 जनवरी 2011

मातृभूमि और राष्ट्रभक्ति...

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लीलाधर जगूड़ी समकालीन हिन्दी साहित्य के प्रमुख और प्रतिनिधि कवि हैं. उनकी एक कविता जो मुझे बहुत प्रिय है अनायास याद आ रही है. चूँकि कई बार...
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सोमवार, 24 जनवरी 2011

रेलगाड़ी रेलगाड़ी...

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परसों सलिल जी ने अपने ब्लॉग पर एक पोस्ट लिखी थी भारतीय रेलवे के बारे में। इसमें उन्होने एक रेलकर्मी की अनोखी सज़ा का वर्णन किया था। इस...
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रविवार, 16 जनवरी 2011

अखबार की खबरें और जोर का झटका...

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रोज सुबह अखबार पढ़ना मुझे भी पसंद है। ज्यादा नहीं तो कम से कम एक अखबार तो होना ही चाहिए। पर अक्सर अखबार पढ़कर बहुत चिंतित हो जाता हूँ। ये चि...
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मंगलवार, 4 जनवरी 2011

एक असामान्य दिन

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इस तरह हुई नए साल की शुरुआत .. . कुछ व्यस्तताओं की वजह से यह लेख कुछ देर से पोस्ट कर रहा हूँ।    हम और आप रोज काम पर जाते हैं और वही रूटीन...
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रविवार, 26 दिसंबर 2010

फिर सुनाओ यार वो लम्बी कहानी

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सर्वप्रथम सभी साथियों और वरिष्ठजनों को नववर्ष 2011 की अग्रिम शुभकामनाएँ... आप सभी के लिए आने वाला यह साल मंगलमय रहे यही कामना करता हूँ आज प्...
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सोमवार, 20 दिसंबर 2010

प्रतीक... एक कविता

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सूर्य का ढलना प्रतीक है इस बात का कि हमेशा नहीं रहता दिन का उजाला और सूर्य का निकलना प्रतीक है इस बात का कि हमेशा नहीं रह सकता रात ...
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कुछ मेरे बारे में

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सोमेश सक्सेना
भोपाल, मध्य प्रदेश, India
थोड़ा बहुत लिख लेता हूँ पर न तो इतनी प्रतिभा है न समर्पण कि खुद को लेखक कह सकूँ। हाँ "लगभग लेखक" अवश्य हूँ। इस अक्षमता के कारण ब्लॉगिंग भी कायदे से नहीं कर पाता हूँ इसलिए "'लगभग ब्लॉगर" भी हूँ। और अपने बारे में क्या कहूँ? मैं न तो बहुत अच्छा हूँ, न बहुत बुरा। न बहुत ईमानदार हूँ और न ही बहुत बेईमान। कोई बड़ा आदमी भी नहीँ हूँ। एक बहुत ही साधारण व्यक्ति हूँ बस। प्रकृति, कला, संस्कृति, साहित्य से विशेष लगाव है।
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