सोमवार, 20 दिसंबर 2010

प्रतीक... एक कविता


सूर्य का ढलना

प्रतीक है इस बात का

कि हमेशा नहीं रहता

दिन का उजाला

और

सूर्य का निकलना

प्रतीक है इस बात का

कि हमेशा नहीं रह सकता

रात का अँधेरा



- सोमेश

19 टिप्‍पणियां:

  1. सदा सिर्फ विचार बहते हैं
    जो बहा ले जाते हैं सबको
    अपने साथ
    अपने सिवाय
    सबके पास
    सबके सिवाय
    गिरीश बिल्‍लौरे और अविनाश वाचस्‍पति की वीडियो बातचीत

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  2. शाबाश सोमेश !
    मानव जीवन पर खरी उतरती सच्ची अभिव्यक्ति है जो है एक के जीवन में अक्सर सामने आती हैं !
    अच्छे लेखन के लिए शुभकामनायें !

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  3. Yah kavita dekhane me bahut samany lagatee hai, aisa lagta hai isme kahane wali kya baat hai. par vastav me iska bahut gahara arth hai. yahi is kavita ki khasiyat hai.

    Congrats

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  4. बेहतरीन अभि्व्यक्ति
    इस रचना में "दर्शन" भी है कि हमें जिन्दगी को दोनों पहलुओं में स्वीकार करना होगा। दिन और रात, सुख और दुख दोनों को पूर्णरूपेण स्वीकार करना होगा। जो अलग-अलग नहीं है।
    धन्यवाद यह रचना हमें पढवाने के लिये
    मुझे ये पंक्तियां बहुत ज्यादा पसन्द आयी हैं और आपसे आशायें बहुत बढ गई हैं कि इसी प्रकार आपका लेखन निरन्तर हमें उपलब्ध रहेगा।

    प्रणाम स्वीकार करें

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  5. सच में हमें प्रकृति कितना कुछ सिखाती है,पर हम प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं,इसीलिए उसके भावों और संकेतों को पढ़ पाने में असमर्थ रहते हैं.

    सुंदर अभिव्यक्ति !

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  6. वाह! क्या कहूँ? जीवन के नियमों की इतनी सुदर अभिव्यक्ति, वह भी सूर्य के माध्यम से. बहुत ही अच्छा लगा!

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  7. sसुख दुख दिन रात के समान है। हमेशा एक से दिन नही रहते। बहुत सुन्दर आशा को जगाती पाँक्तियाँ। बधाई। और शुभकामनायें।

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  8. कम शब्द..गहरी बात..
    बेहतरीन रचना..
    बांटने के लिए शुक्रिया..

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  9. आप सभी सुधीजनो का हार्दिक आभार।

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  10. जीवन को बहुत ही सरल ढंग से कविता में पिरो दिया है आपने। बधाई।

    ---------
    मोबाइल चार्ज करने की लाजवाब ट्रिक्‍स।

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  11. प्रिय बंधुवर सोमेश सक्सेना जी
    नमस्कार !

    अच्छी लघु कविता है … बधाई !

    सूरज उगता … तिमिर में लाता नया प्रकाश !
    अंधियारा मिट जाएगा, मत हो मीत उदास !!

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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    ~*~नव वर्ष 2011 के लिए हार्दिक मंगलकामनाएं !~*~


    ******************************************************


    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  12. @राजेन्द्र स्वर्णकार जी

    सूरज उगता तिमिर में
    लाता नया प्रकाश !
    अंधियारा मिट जाएगा, मत हो मीत
    उदास !!

    बहुत ही सुंदर और सारगर्भित पंक्तियाँ दी हैं आपने। बधाई एवं आभार।
    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ आपको भी।
    सोमेश

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  13. रात अँधेरे की शमा लिए खड़ी थी
    सूरज आगोश में ले, लौ देता रहा .....

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  14. @ हरकीरत ' हीर' जी

    रात अँधेरे की शमा लिए खड़ी थी
    सूरज आगोश में ले , लौ देता रहा .....

    बहुत खूब, शुक्रिया आपका।

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  15. Of course right u are. after day, it is night; after defeat thereis win; after meeting there is departure--- hard realities of life conveyed in a single stroke. Great ! Decide to follow U.

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  16. @ जगदीश बाली जी
    बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार... इसी तरह उत्साहवर्धन करते रहें..

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  17. क्या बात है..
    मेरे नाम पर भी ऐसी सुन्दर कृति..
    धन्यवाद :)
    और आभार

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