चूँकि मैं न तो शब्दों का धनी हूँ और न ही कहीं से साधक हूँ इसलिए सबसे पहले तो मैंने इसका नाम शब्द साधना बदलने का निर्णय लिया। नाम रखते समय जो गलती हुई थी उसे सुधारना भी तो जरुरी है -देर से ही सही। (वैसे भी किसी ब्लॉगर ने मुझसे कहा था कि इस नाम से लगता है किसी बड़े साहित्यिक का ब्लॉग है, एक अन्य ब्लॉगर ने कहा कि बड़ा भारी भरकम नाम है लगता है जैसे कम से कम पचास साल के आदमी का हो।) अब लेखन में रूचि होने के बावजूद ब्लॉग लेखन तो मैं ठीक से कर नहीं पाया, न तो नियमित रूप से ब्लॉग लिखता हूँ और न ही दुसरे ब्लॉग्स पर टिप्पणी करता हूँ इसलिए मैं खुद को ब्लॉगर के बजाय "लगभग ब्लॉगर" मानता हूँ। बस इसलिए ब्लॉग का नाम भी रख दिया "लगभग ब्लॉग", वैसे भी जिस ब्लॉग पर छह साल में तीस पोस्ट भी न हों उसे ब्लॉग के बजाय लगभग ब्लॉग कहना ही उचित होगा। नाम बदलने के साथ मैंने इसमें थोड़े बहुत बदलाव भी कर दिए। बहुत से अनावश्यक से विजेट्स हटा दिए और कुछ पोस्ट भी डिलिट कर दिए जो मुझे अब फालतू लगे। बहुत से लोगो ने मुझसे पूछा कि मैंने ब्लॉग लिखना बंद क्यों किया? दरअसल इसके बहुत से कारण हैं। एक तो यह कि तब कुछ व्यस्तताओं के चलते अधिक समय ब्लॉग को नहीं दे पाया। काफी समय तक इंटरनेट और कंप्यूटर कि अनुपलब्धता भी रही। फिर स्वभाव से ही आलसी हूँ तो लिखने मैं भी आलस करता रहा, और मुझमें इतनी प्रतिभा भी नहीं है कि निरंतर सृजन करता रहूँ। एक कारण यह भी है कि हिंदी ब्लॉग जगत से मेरा मन भी कुछ उचट सा गया था। यहाँ का चलन कि टिप्पणियों कि संख्या ही ब्लॉग कि लोकप्रियता और गुणवत्ता का प्रमाण माना जाता है, मुझे निराश सा करता रहा। बहुत से ऐसे ब्लॉग मिले जो बिलकुल भी स्तरीय और पठनीय नहीं हैं पर उनमें कमेंट्स कि लाइन लगी होती है। कमेंट के बदले कमेंट की परिपाटी ने हिंदी ब्लॉग का बहुत नुक्सान किया है। पर जैसा मैंने कहा कि यह एकमात्र कारण नहीं है। बहुत से बेहतरीन ब्लॉग्स भी मुझे पढ़ने को मिले, पर ऐसे ब्लॉग्स का प्रतिशत बहुत कम है। बाद में मैं फेसबुक पर थोडा सक्रिय हो गया और वहाँ विचार व्यक्त करना ब्लॉग से ज्यादा आसान और सुविधाजनक है इसलिए भी ब्लॉग पर लिखना टलता गया।
अब ब्लॉग तो मैंने फिर से शुरू कर दिया है मगर इसे नियमित रूप से कर पाउँगा इसमें मुझे गहरा संदेह है। कारण वही सब है जो मैंने ऊपर लिखे हैं। इसलिए इस बार मैंने खुद के लिए दो नियम बनाये हैं -
- कोई भी पोस्ट तभी लिखूंगा जब वास्तव में लिखने के लिए मेरे पास कुछ हो। केवल पोस्ट्स की संख्या या नियमितता बढ़ाने के लिए कभी नहीं लिखूंगा, चाहे दो पोस्ट्स के बीच कितना भी समय अंतराल हो।





